पूजा

दीवार पर कील से टँगे भगवान 
ठीक नीचे खूँटी पर टँगा पसीना
धूप अगरबत्ती? 
नहीं रे, पूजा तो हो गई!
रोटी ठंडी हो रही है,
प्रसाद पा ले। 

पसीना

(1) 
पसीना 
टेबल पर टपकता है। 
खेत में टपकता है। 
फर्श पर टपकता है। 
दिन भर काम करते थक जाता है –
बिस्तर में रिसता है।

(2) 
पसीना 
निकलता निर्गन्ध है ।
हवा, इत्र, फुलेल, साबुन
बिगाड़ देते हैं आदत। 
कुछ भी कर लो 
गन्धाता रहता है। 


(3) 
जब डूब जाता है पैसा मार्केट में। 
जब परीक्षा के सवाल
किताबी याददाश्त गुम कर देते हैं।
जब फुलाई सरसो 
रातो रात लाही से मार जाती है। …
बिना परवाह किए कि 
बाहर जाड़ा है, गर्मी है कि बरसात 
पसीना निकलता है, 
हवा से जुगलबन्दी करता है 
और धीरे से दे जाता है
फिर से उठने लायक साँस।


(4) 
बाहर की दिन भर की चखचख
रोज गन्दे होते घर की सफाई
धीरे धीरे घिसते रहते हैं रिश्ते को।
इससे पहले कि रिश्ता दरके  
पसीना रातों को प्रीत के लेप लगाता है 
और सुबह तैयार हो जाती है – 
एक दिन भर चखचख 
एक दिन भर गन्दगी 
झेलने को। 

  

मैं मज़दूर नहीं …

पसीना पहचान है
कि सब कुछ ठीक ठाक है ।
खून बह रहा है
शरीर में धातुएँ पुष्ट हो रही हैं ।
निकलता है तो होता है निर्गन्ध
टूट पड़ते हैं बैक्टीरिया, जीवाणु, वायरस
और कुछ ही देर में
गन्धाने लगता है – पसीना।
सुबह नहा धो
डियो इत्र लगा
पहुँचता हूँ ऑफिस
एसी कार से,
भाग कर घुसता हूँ एसी ऑफिस में
रूम फ्रेशनर और डियो
सुगन्ध ही सुगन्ध
संतोष होता है दुर्गन्ध नहीं
पसीना नहीं ।
पसीना मज़दूरियत को जाहिर न कर दे !
भयमुक्त  रहता हूँ सुबह सुबह।
दिन चढ़ता है –
बाहर कुछ भी तापमान हो
भीतर स्थायी तापमान 20डिग्री
– ऑपरेटर !18 रखा करो
जी साब ।
बाहर धूप में
सड़क पर, बस में, छाँव में – सर्वत्र
घन मार, जोर लगा, उइ दैया !
सखी जोर लगाओ !
टेढा है, सीधा करो !
अरे भाई हाथ लगाओ, एक से नहीं होगा।
पसीना ही पसीना
बह रहा है –
मेरा सीना – नो पसीना
विशिष्टता का सुख
शिष्टता का सुख –
दूर कहीं काम रुक गया है
हायर अप्स की विजिट है –
पेशानी पर बूँदें छलक आई हैं
तापमान 18 डिग्री ही है –
…आइ वांट रिजल्ट डियर !
ये बहानेबाजी किसी और को सुनाओ …
साब ! गाड़ी नाके पर पकड़ी गई
आज डिलेवरी नहीं हो पाएगी –
स्टॉप दिस नानसेंस ! नैंसी !
भीतर पसीना ही पसीना
तापमान 18 डिग्री
बैक्टीरिया काम पर लग गए हैं –
बगलों से भयानक दुर्गन्ध …
नैंसी कौन सा परफ्यूम लगाती है ?
..ओन्ली वन डे मिस्टर
टुमारो कट …
ऑफिस का वक्त खत्म हो गया
बाहर निकलता हूँ
दुर्गन्ध ही दुर्गन्ध
मज़दूर ही मज़दूर –
पसीने के बहाव घरों को जा रहे हैं
एसी कार, बस, पैदल सब बराबर
पसीना सब को बराबर कर देता है
दुर्गन्ध ज़िन्दगी का सबूत है
..साबुन में बसे मृत फूलों की गन्ध
शरीर पर रगड़ रहा हूँ –
मुझे दुर्गन्ध बर्दाश्त नहीं
मैं मज़दूर नहीं …