कभी हो मेरे यार

उद्धरण

कभी हो मेरे यार कि यूँ ही जान मिलें

बहते पत्तों सी रवानी फिर जुबान सिलें।  

तमाम जिल्दें हों साया हमारी खामोशी    

पलटें पन्नों की खड़खड़ बस अहान मिलें।

यूँ कहना तुम्हारा और सुनना हमारा

छुयें सूरज सौ सरवर कमल हजार खिलें।