मुहब्बतों की तमाम बातों में…

फूल रखा है तुम्हारे सामने कहते हो कि पत्थर है
तो सिर से लगाना सँभाल रखना इसे शालिग्राम की तरह।
चमकते तो खूब हो पर लोगों को कसौटी चाहिये
घिस देना खुद या कह देना घिसने को बात बन जायेगी
खुशबू मिले तुम्हें न मिले इसकी शख्सियत तुमसे चमक जायेगी।
सूख जायेगा जब तो जानोगे कि था वाकई एक फूल
खुशबू उड़ जायेगी भेंट रह जायेगी,
मुहब्बतों की तमाम बातों में एक और बात जुड़ जायेगी।

Advertisements