कौन पढ़ेगा?

फूल पन्नों के बीच मुरझाते नहीं,
मिल कर अचानक नम आँख से,
भर उदासी खिलखिलाते नहीं।

– मोबाइल बदलता है और एस एम एस ग़ायब हो जाते हैं –

न किसी के इंतज़ार में चेहरा होता लाल धूप में
न एक माँ की डाँट चन्द कतरे टाँकती रूप में
न किसी के भाल का रोली चन्दन मन्दिर बुलाता है।

– हाथ कवर, चेहरा कवर, धूप ढलते कोई और अपना हो जाता है –

अब गतिमय संसार में ठहरना पिछड़ना हो जाता है
कौन पढ़ेगा तुम्हारी कहानी, बरसों पुरानी
अब भी लिखते ठहर जाती है जो?