उन सबकी गन्ध

मैंने पढ़ना छोड़ दिया है। न वह अकारथ नहीं था, लीकें तो उससे ही बनीं लेकिन मैं भर चुका था लबालब और कुछ साल पहले जो टूटी थी दीवार, अब तक बहे जा रहा हूँ। आऊँगा फिर से जब सूखा पड़ जायेगा। तब तक देखते रहना पानियों के रंग को, चखते रहना उनके स्वाद को, तुम्हें उन सबकी गन्ध मिलेगी।

Advertisements

नामाकूल

नामपर नामसर नामचर नामखर 

नामभर नाममर नामोखर नामधर

नामखा नामपा नामआ नामजा

नामसा नामका नामभर नामकर

नामचा नामची नामसू नामभू

नामतू नामऊ नामफर नामतर

नामधा नामदान नाबदान नाम

नामकी नामड़ा नामजी नाममर

नामलिख नामपढ़ नामालो नामचना

नामथो नामथा नामबा नामजे नामघना

नामगा नामरो नामपोछ नामदो

नामधो नामगू नामराम नामसो।

उम्मीद

हुये बरबाद जो हम, वे आबाद रहते हैं,
हमारी हर बला को जो शाद कहते हैं।

कर दिया पहले ठूँठ हमारे हाथों को,
हर जुम्बिश को अब फरियाद कहते हैं।

नहीं भरोसा सय्यादों के उस न्याय पर,
कहकहों में खुद जिसे वे बन्दरबाट कहते हैं।

पेट में बदहजमी बेसुवाद है जुबाँ,
रख कर जाम आगे शुक्रिया झन्नाट कहते हैं।

उम्मीद रक्खो, मुर्दापरस्तों की बस्ती से,
कुछ भी हो, हमेशा जिन्दाबाद रहते हैं।