सच है

आ जाओ
आज की रात सच है
देह सच है
मन सच है।
रम जाँय अभी –
सोचना, पछताना
सब कल सच हैं।
अर्घ्य आहुति कर लें
आदिम आराधन कर लें
अंतरघट के ईश सच हैं।