सच है

आ जाओ
आज की रात सच है
देह सच है
मन सच है।
रम जाँय अभी –
सोचना, पछताना
सब कल सच हैं।
अर्घ्य आहुति कर लें
आदिम आराधन कर लें
अंतरघट के ईश सच हैं।

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गुप्त ऊष्मा

बाहर पिघलन – स्वेद।

भीतर पिघलन – हवन।

तपते हम – जमते हम

काल – दिवंगत!