27 सितम्बर पर


दिल दे तू इस मिज़ाज का परवरदिगार दे
जो ग़म की घड़ी को भी खुशी से गुज़ार दे।
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सजा कर मय्यत-ए-उम्मीद नाकामी के फूलों से
किसी हमदर्द ने रख दी मेरे टूटे हुए दिल में। 
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छेड़ ना ऐ फ़रिश्ते! तू ज़िक्रे ग़मे जानाँ
क्यों याद दिलाते हो भूला हुआ अफसाना? 
________:      *       :________

भगतसिंह की जेल नोटबुक (1929 – 31) ,  पृष्ठ  24(27)
आभार: शहीदेआज़म की जेल नोटबुक 

आज ‘अद्भुत प्रेमी’ भगतसिंह का जन्मदिन है (27 सितम्बर 1907)
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