एक मित्र के जन्मदिन पर . .

एक कदम और..
जीवन सौन्दर्य में भ्रमण को।

एक कदम और
गुदगुदाहट, किसी भोले इंसान की निश्छ्ल हँसी सा।
एक कदम और
संगिनी के साथ सुबह की टहल सा
एक कदम और
बच्चों के साथ स्कूल की बस तक
एक कदम और
लंच में बाहर धूप में गुनगुने होने सा
दोस्तों के साथ हँसी ठठ्ठा सा।
 
ज़िन्दगी जाने कितने कदम सँजोए है !
एक कदम और चल लें – उमंग और उत्साह के साथ?
आज एक विशेष कदम लें – पहली बार सा
चलो जन्मदिन मनाते हैं।
Advertisements

27 thoughts on “एक मित्र के जन्मदिन पर . .

  1. एक कदम और …एक कदम और …जिन्दगी यूँ ही चले भोली निश्छल हंसी में पगी साथ उमंग और उत्साह से …जिसका भी है ….जन्मदिन मुबारक हो ….

  2. साहब ,हर नव – वर्ष एक नया कदम है , सीढ़ी पर रखा जाने वाला ! मंजिल की ओर जाती सीढियां और उनपर रखा जाता कदम ! पहली बार सा उत्साह नवोन्मेष है , आपके साथ मैं भी हूँ — …'' आज एक विशेष कदम लें – पहली बार साचलो जन्मदिन मनाते हैं।''…

  3. वाह वाह…!!बहुत सुन्दर…ये एक कदम,ख़ुशी में पगा हुआ,भोर सा जगा हुआकिसी के लिए रुका हुआसमर्पण में झुका हुआदेखिये न ! कैसे लोग नया जन्म पाते हैं….

  4. कविता को बहुत बहुत व्यापक रूप में लिया जाना चाहिए। यह कविता एक खूसट बुढ्ढे मित्र के जन्मदिन पर है, जिसने अपने जैसे ही तीन चार और खूसट बुड्ढों के साथ मिल कर मुझे सोचने की तमीज सिखाने की कोशिश की। जिसने प्रश्न करना सिखाया, जिसने जीवन की छोटी छोटी बातों को भी मानवीय सम्वेदना के साथ देखने को सिखाया … मेरा वह मित्र बहुत पहले दिवंगत हो चुका है। उससे सशरीर मैं कभी नहीं मिला। … उसे लोग मार्क्स कहते थे।

  5. एक खूसट बुढ्ढे मित्र के जन्मदिन पर मेरी भी शुभकामनायें,कविता पसंद आई, अपने एक समवयस्क मित्र के आगामी जन्मदिन पर कार्ड में लिख कर देने की अनुमति चाहता हूँ, मिलेगी क्या ?

  6. @ … उसे लोग मार्क्स कहते थे।———– 'हैं' कहिये , वर्तमानता का आग्रह नाजायज नहीं होगा साहब ! ………..उम्मीद कल थी की आप बात वहीं से उठा रहे हैं पर कविता से यह निकालना थोड़ा कठिन लग रहा था ! आभार !

  7. मार्क्स का जन्मदिन मना रहे हैंऔर इसलिए ये कदम उठा रहे हैंतो क्यों नहीं बता रहे हैंहम तो कुछ और समझेअब आप कुछ और समझा रहे हैं…..हाँ नहीं तो…!!

  8. आपके तरीके अनोखे होते हैं…अनोखापन ले डूबा…कविता की किरकिरी में सफ़ाई के लिए आना ही पड़ा…काश ना आते…और शीर्षक भी ऐसा रखा होता कि…जन्मदिन पर….और हमारी भी बधाईयां स्वीकार करते…वैसे कविता अपने आप में वहां नहीं पहुंचा सकती थी…जो कि है भी नहीं….

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s