इबादत

ज़र्रा ज़र्रा है खुदाई नूर से रोशन 

हम इबादत में आँखें मूँदे बैठे हैं। 
 
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13 thoughts on “इबादत

  1. लीजिये हम भी इबादती-ठोंक शेर-वा रहे हैं — '' जब इबादत में आँख ज़रा ज़रा खुली रहे ,तब इबादत का लुत्फ़ और भी नूरानी है | ''————– तन्मनिया-चितवन को तो आप बखूबी जानते ही हैं न !

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