एक और कुकर्म की भूमिका

मेरे कुकर्मों की निन्दा न करो
मेरे कुकर्म निम्नतर हैं 
मेरे कुकर्म तुम्हें स्वीकार्य होने चाहिए: 
उसने बलात्कार किया – तुम चुप रहे 
उसने घोटाला किया – तुम चुप रहे 
उसने देश को समझौते के नीचे दफन कर दिया – तुम चुप रहे 
आज मेरे निम्नतर कुकर्म पर 
तुम इतने प्रगल्भ क्यों हो?
तुम पक्षपाती हो 
तुम उसके साथी हो
तुम्हारे मन में चोर है – 
तुम्हें याद दिलाता हूँ
तुम्हारी कसौटी ।
तुम्हें दुनिया में हो रहे
हर कुकर्म , हर अत्याचार, हर घपले
से गुजरना होगा
उन पर लिखना होगा – 
इसके बाद ही तुम लिख सकते हो मेरे स्याह कर्म 
कराह सकते हो
मेरे कुकर्मों की तपिश से झुलसते हुए –
बेहतर है चुप रहो जैसे पहले रहे थे 
तुम्हारा मौन  तुम्हारा कवच है
गारंटी है
कि
तुम निरपेक्ष हो इस सापेक्ष दौर में – 
बोलने पर तुम्हें सफाई देनी होगी :
उसने बलात्कार किया – तुम चुप रहे
उसने घोटाला किया – तुम चुप रहे
उसने देश को समझौते के नीचे दफन कर दिया – तुम चुप रहे
क्यों ? 
.. अब देखो न तुम्हें इस ‘क्यों’ पर टाँग 
मैंने अपनी टाँगे फैला दी हैं
एक और कुकर्म की भूमिका में – 
उम्मीद है कि टँगे हुए तुम 
चुप रहोगे। 

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