नजर पिचकारी

फेर दो रे साजन नजर पिचकारी
न समझो मैं कारी
चढ़ जाएगी सारी नजर पिचकारी।

दाल में नमक ननदिया छिनारी
बिष बढ़ाई बाति महतारी पे डारी
न समझो मैं कारी।

मटकी थी भारी दही छलकी अनारी
सासु गारी दिहिन न सहाया मैं नारी
न समझो मैं कारी।

मेह ढलका नहीं मोरि अँखियाँ सकारी
जोत इनमें बसी तोरी नेहिया सँभारी
न समझो मैं कारी।

फेर दो न साजन नजर पिचकारी
चढ़ जाएगी सारी नजर पिचकारी। 

Advertisements

11 thoughts on “नजर पिचकारी

  1. फेर दो ना सजन नजरिया पिचकारी..जो चढ़ जइहे रंग तोलजई के मैं जाउंगी मारी..दौड़े आवेंगे ओझा.. दौड़े आवें पुजारी..जो इकबारी मोको लागी नजरिया तोहारी..करी लाख जतनवा.. पै ना जइहेनजरिया उतारी….फेर दो ना सजन..जुगलबंदी.. 🙂 हा हा हा.. जय हिंद… जय बुंदेलखंड…

  2. फेर दो रे साजन नजर पिचकारी न समझो मैं कारी चढ़ जाएगी सारी नजर पिचकारी।तोरी नजरिया मतवारीरंग डारी सारी अनारीकौन रंग पिचकारीहम भई सांवरी सकारीअद्भुत !! कविताई रचाई है…कहाँ से ई भाव जोगाई हैहाव-भाव मनवा लुभाई हैनयनन से होरी खेलाई है …

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s