संक्रांति संग जाएगा बचपना

घर में आइस पाइस*
ठिठुरन संग।
छुपा हूँ रजाई में।

ठिठुरन देखती
पकड़ नहीं पा रहीIMG213-01
कह नहीं पा रही
– वो: देखो !

रोज होता ऐसा 
पर आज ठिठुरन
आई संक्रांति सहेली संग।
संक्रांति बेशरम
खींचती है रजाई

नहाने को कहती है।
संक्रांति आई है
बस एक दिन के लिए
ठिठुरन सहेली संग जाएगी
अनजान देश।

मैं भी खुश
चलो ठिठुरन संग
जाएगा बचपना भी
रजाई में दुबक छिपना।

कितना अजीब !
सहेली के जाने पर भी
यूँ खुश होना।

आज मित्र बसंत की पाती आई है।
आने का वादा किया है।
_________________
* आइस पाइस – लुका छिपी का खेल।

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15 thoughts on “संक्रांति संग जाएगा बचपना

  1. प्रातः स्नानसूर्य नमस्कारदान चावल स्पर्शसबके नाम से सीधातिल गुड का भोगनाना प्रकार के लाइमकर संक्रांति की पावन सुबह है येसभी को बधाई!दही चुडा भोजनपतंगे गुल्ली डंडासंध्या स्वादिष्ट खिचड़ीतरकारी, पापड़, चोखा…

  2. वाह भाई बड़ा अच्छा लगा .. '' पर आज ठिठुरन आई संक्रांति सहेली संग '' पर क्या सच ही ठिठुरन संक्रांति की सहेली बन कर आयी है ?अंतिम में तो गजब ही रहा .. एकदम फिट ..'' आज मित्र बसंत की पाती आई है।आने का वादा किया है।''

  3. ठिठुरन आयी संक्रांति सखी संग ….जाना है परदेश अब …ठिठुरन भी चली जायेगी …संक्रांति भी गयी …बचपना ….कभी नहीं …!!वसंत की पाती आयी हैं …बेजोड़ कविता …!!

  4. इस बार संक्रांति ने आपको "टीप" मार दिया…….बच्चे लोग तो ये फोटू देख कर हँसते हँसते लोट पोत हो रहे हैं…..मैंने बताया कि ये निर्विवाद "आलसी सम्राट" हैं….बहुत कुछ "लापतागंज " के "कछुआ काका" की तरह………वसंत आगमन की शुभकामनाओ सहित……..

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