वन्दे मातरम्



वन्दे मातरम्

माँ ! तुम्हें किसी सम्प्रदाय के प्रमाणीकरण और स्वीकार की आवश्यकता नहीं है।

‘वन्दे मातरम’ 
हे शब्द समूह ! तुम्हें किसी जड़ मान्यता के भाष्य की आवश्यकता नहीं है।
 तुम स्वयंसिद्ध हो प्रात: उगते सूर्य को देख उपजे आह्लाद, सम्मान और विनय की तरह।
तुम स्वयंसिद्ध हो हमारे जीवन को ले धमनियों में दौड़ते रक्त प्रवाह की तरह।  
तुम स्वयंसिद्ध हो हमारे मन में उमड़ते पुरनियों के प्रति सम्मान की तरह।
हमारी आगामी पीढ़ियाँ भी तुम्हें साँसों में ऐसे ही घुलाए रखेंगी – जीवन दुलार की तरह।
हमारी पीढ़ियाँ कृतघ्न नहीं होंगी।
उन्हें मूर्तिपूजक होने पर गर्व रहेगा
हे शब्द समूह, हम उन्हें ऐसे संस्कार देंगे।
वन्दे मातरम।                                               (चित्राभार: http://kamat.com/kalranga/freedom/s210.htm)
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 “This flag is of Indian Independence! Behold, it is born! It has been made sacred by the blood of young Indians who sacrificed their lives. I call upon you, gentlemen to rise and salute this flag of Indian Independence. In the name of this flag, I appeal to lovers of freedom all over the world to support this flag.”  
— B. Cama , Stuttgart, Germany, 1907
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