प्रार्थना – ब्लॉग पर मेरी पहली कविता

धूप!
आओ,अंधकार मन गहन कूप
फैला शीतल तम ।मृत्यु प्रहर
भेद आओ। किरणों के पाखी प्रखर
कलरव प्रकाश गह्वर गह्वर
कर जाओ विश्वास सबल ।
तिमिर प्रबल माया कुहर
हो छिन्न भिन्न। सत्त्वर अनूप
आओ। अंधकार मन गहन कूप
भेद कर आओ धूप।
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15 thoughts on “प्रार्थना – ब्लॉग पर मेरी पहली कविता

  1. गिरिजेश जी,आपकी प्रार्थना अच्छी लगी।तिमिर प्रबल माया कुहरहो छिन्न भिन्न। सत्त्वर अनूपआओ। अंधकार मन गहन कूपभेद कर आओ धूप।सुन्दर शब्द संयोजन एवं अभिव्यक्तिसादरअमित

  2. भैया, लगता है अब आप आलस्य त्याग कर ब्लॉग मण्डली में शामिल होने के लिए जाग खड़े हुए हैं। बधाई। मुझे कविताएं कम ही समझ में आती हैं। लेकिन इसे पढ़कर सहसा वाह-वाह निकल ग्या।

  3. आओ। अंधकार मन गहन कूपभेद कर आओ धूप। आप की रचना प्रशंसा के योग्य है . लिखते रहिये चिटठा जगत मैं आप का स्वागत है गार्गी

  4. हुज़ूर आपका भी ….एहतिराम करता चलूं …….इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं ऽऽऽऽऽऽऽऽकृपया अधूरे व्यंग्य को पूरा करने में मेरी मदद करें।मेरा पता है:-www.samwaadghar.blogspot.comशुभकामनाओं सहितसंजय ग्रोवर

  5. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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