कुछ यूँ दीवाने हैं वो मुझ पर
कहता हूँ आधा वे ढाई कर देते हैं।
प्रेम शायद इसे ही कहते हैं।
कुछ यूँ दीवाने हैं वो मुझ पर
कहता हूँ आधा वे ढाई कर देते हैं।
प्रेम शायद इसे ही कहते हैं।
फूल पन्नों के बीच मुरझाते नहीं,
मिल कर अचानक नम आँख से,
भर उदासी खिलखिलाते नहीं।
- मोबाइल बदलता है और एस एम एस ग़ायब हो जाते हैं -
न किसी के इंतज़ार में चेहरा होता लाल धूप में
न एक माँ की डाँट चन्द कतरे टाँकती रूप में
न किसी के भाल का रोली चन्दन मन्दिर बुलाता है।
- हाथ कवर, चेहरा कवर, धूप ढलते कोई और अपना हो जाता है -
अब गतिमय संसार में ठहरना पिछड़ना हो जाता है
कौन पढ़ेगा तुम्हारी कहानी, बरसों पुरानी
अब भी लिखते ठहर जाती है जो?
धनिया उदास है, पानी की तलाश है
कपड़े पर दाग है
न उठता झाग है
न बनता साग है
रहता कच्चा भात है, धनिया उदास है।
गोबर खाद है, ऑर्गेनिक नाम है
बड़का दाम है
खेती नाकाम है
बढ़ गया काम है
फोकट दाम है, गोबर खाद है।
धनिया उदास है, नीति बकवास है
सरकार नाग है
सिमटा लाभ है
घटती माँग है
पूर्ति अभिलाष है, धनिया उदास है।
धनिया बहलाने को, गोबर दुलराने को
धनिया सहलाने को, बैठक आज खास है
तेज सबकी साँस है
धनिया सु-दास है
गोबर की आस है
थरिया उपास है
करने को बकवास है, बैठक आज खास है।
हवा में बास है कि मन में आस है
समझ नहीं आता समझता खास है
बउरा गया आम
भरता उसाँस है
उदास इजलास है
कुत्तों ने उतार ली, चादर चाम है
चीर फाड़ चट्ट का, सुन्दर नाम है।
बात बताने को, इशारे समझाने को
लंगोटी पहनाने को, नंगई भुलवाने को
कविया संडास है
हगता भँड़ास है
कमरा गन्धास है
बाहर फुलवास है
पागलपंथी छोड़ कर, पहुँचा विभाग है
बैठक जमी बकवास, लग गया दिमाग है।
तो अंत में क्या बचा?
तो अंत में क्या रहा?
एक नाम दुइ काम, धनिया अब भी उदास है।
गोबर खाद है
बकवास है
बैठक खास है
सरकार नाग है
सिमटा लाभ है
घटती माँग है।
दिमाग है तो मत कहो कि अब भी
हाँ, अब भी – थरिया उपास है
वरना फिर से फिर फिर
इजलास है
बैठक आज खास है
तेज सबकी साँस है
गन्धास है
सबसे ऊपर अब भी संडास है।
मैंने पढ़ना छोड़ दिया है। न वह अकारथ नहीं था, लीकें तो उससे ही बनीं लेकिन मैं भर चुका था लबालब और कुछ साल पहले जो टूटी थी दीवार, अब तक बहे जा रहा हूँ। आऊँगा फिर से जब सूखा पड़ जायेगा। तब तक देखते रहना पानियों के रंग को, चखते रहना उनके स्वाद को, तुम्हें उन सबकी गन्ध मिलेगी।